Dharbhanga Terror Connection : दरभंगा में IM आतंकी यासीन भटकल ने निकाह कर बोया था आतंक का बीज, फिर निकली जड़ें

in #latest2 years ago

दरभंगा : बिहार में आज एनआईए ने नालंदा, दरभंगा, पटना और मोतिहारी में बिहार के टेरर मॉडल का कनेक्‍शन तलाशने के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की। सुबह से ही एनआईए की टीम ने आतंक कनेक्‍शन पर प्रहार किया। लेकिन इन देश में हर बार आतंकी साजिश के तार दरभंगा से जुड़े हैं। भारत में इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक यासीन भटकल ने दरभंगा से ही अपने इसकी शुरुआत की थी। एक बार फिर नूरुद्दीन जंगी, अतहर परवेज, अरमान मलिक की गिरफ्तारी के बाद दरभंगा सुखियों में आया है। यासीन भटकल का खड़ा किया गया आतंकी सेल एक बार फिर से चर्चा में है। उसने बड़ी चालाकी के साथ दरभंगा को आतंक का अड्डा बनाया था।

भटकल ने दरभंगा से रिश्‍ता जोड़ने के लिए की थी शादी
यासीन भटकल ने दरभंगा में अपने आतंक जाल बिछाने और लोगों का विश्‍वास जीतने के लिए उसने यहां सबसे पहले कादिराबाद के एक साइकिल का पंक्चर बनाने वाले मो. कफील के घर होमियोपैथी के डॉक्टर के रूप में बैठना शुरू किया। कहा जाता बाद में उसी की बेटी से निकाह भी कर लिया। भटकल यहांं मुफ्त में गरीबों का इलाज करता था। जिससे धीरे-धीरे उसकी पैठ बढ़ती गई। लोग उसे अच्‍छा आदमी समझने लगे उसने लोगों का विश्‍वास जीतने के बाद आतंकी मंसूबे को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया। उसने अपने समुदाय के लोगों से मेलजोल बढ़ाया। इसके बाद यासीन भटकल ने दरभंगा के केवटी, जाले, सिंहवाड़ा, हायाघाट और सीमा से लगे पड़ोसी जिले समस्तीपुर के कल्याणपुर इलाके के कई युवकों को इंडियन मुजाहिदीन में भर्ती की। इनके माध्यम से देश के कई शहरों में बम ब्लास्ट करने के आरोप लगे। इन मामलों में दर्जन भर से ज्यादा युवा गिरफ्तार हुए जिनमें से कई अब तक जेलों में बंद हैं। एनआईए समेत तमाम एजेंसियां उन मामलों की जांच कर रही हैं।

सिमी के लोग पीएफआई के जरिए हुए संगठित
दरभंगा के एसएसपी रहे विकास वैभव ने सिमी से जुड़े नेटवर्क को खत्‍म करने की कोशिश की थी। एसएसपी विकास वैभव ने ये ऑरपेशन एनआईए में शामिल होने के बाद ऑपरेशन चलाया था। उस वक्‍त सिमी के सदस्‍य भी इंडियन मुजाहिद्दीन के साथ मिल कर काम करते थे। तब इंडियन मुजाहिद्दीन और सिमी जैसे संगठन प्रतिबंधित नहीं थे। इसलिए माना जा रहा है सिमी के लोग जिनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। उन्‍होंने एक बार फिर PFI के जरिए भारत में आतंकी साजिश रचने की कोशिश की है। आईबी और खूफिया विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार सिमी से जुड़े लोग पीएफआई में शामिल हो गए हैं।

प्रतिबंधित न होने के कारण खुलेआम करते हैं विरोध
बताते चले ये संगठन अभी प्रतिबंधित नहीं है। जिसका लाभ लेकर इनके सदस्‍यों ने अभी हाल में भी दरभंगा थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। इनका विरोध पटना के फुलवारी शरीफ थाने में दर्ज आतंकी साजिश में शामिल लोगों के समर्थन और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में था। पुलिस एफईआऱ (FIR) में दरभंगा के नूरुद्दीन जंगी, मो. सनाउल्लाह और मो. मुस्‍तकिम के नाम संदिग्ध के रूप में दर्ज हैं। इनके ठिकानों पर एनआईए लगातार रेड कर रही है।

यासीन भटकल ने लगाई थी पौध
दरभंगा इससे पहले भी आतंकियों का अड्डा बना रहा है। यहां कभी भारत के कुख्यात आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने अपनी जड़ें जमाई थीं। उसने यहां मुफ्त इलाज और यहां की लड़की से निकाह कर खुद यहां आतंकी पौध लगाई थी। जिसकी जड़े एक लंबे अरसे बाद दिखाई दे रही है। उसने यहां साल 2011-12 से इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के आतंकियों की भर्ती कर आतंकी की पौध लगाई थी। उसने देश के कई इलाकों में धमाके कर तबाही मचाई थी। बाद में एनआईए ने यहां दबिश बनाकर उस नेटवर्क को खत्म किया। इंडियन मुजाहिदीन के सरगना यासीन भटकल को इसी इलाके से भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया गया था। अब एक बार फिर से दरभंंगा भटकल की लगाई पौध ने देश में बड़ी साजिशों को अंजाम देने की कोशिश की है।

धमाके के बाद कान हुए थे खड़े
आम तौर पर बिहार का दरभंगा और बिहार के मिथिलांचल का दिल माने जाने वाला यह इलाका शांत माना जा था। इसलिए ये खास तौर पर आतंकियों की पनाहगार के रूप में निशाने पर आ गया। दरभंगा को इंडियन मुजाहिदीन ने कई सालों तक अपने सेफ जोन के रूप में इस्तेमाल किया। जब बंगलुरु, चेन्नई, वाराणसी और दिल्ली जैसे शहरों में धमाके होने लगे तब इंटेलिजेंस एजेंसियों के कान खड़े हुए। बेंगलुरु का चिन्नास्वामी स्टेडियम ब्लास्ट हो या फिर दिल्ली के धमाके हर मामले से दरभंगा से आतंकियों के कनेक्शन जुड़ने लगे। इसके बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई तो इंडियन मुजाहिदीन के दरभंगा मॉड्यूल का खुलासा हुआ।
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