नवजात जीवन की देखभाल- सामुदायिक एवं स्वास्थ्य इकाई की सहभागिता से” मनेगा सप्ताह

in #hardoi8 months ago

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हरदोई :-हर साल की तरह इस साल भी 15 से 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जायेगा | इस साल इस दिवस की थीम है – “नवजात जीवन की देखभाल- सामुदायिक एवं स्वास्थ्य इकाई की सहभागिता से” | यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रोहताश कुमार ने दी |
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि नवजात मृत्यु दर को कम करने और बीमार नवजात के उपचार के लिए संस्थागत एवं समुदाय आधारित कार्यक्रम चल रहे हैं | नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए चिकित्सालयों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं तथा परिवार की भूमिका अहम होती है |
नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाने का उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती की पहचान एवं देखभाल करना, कम वजन के नवजात की ट्रेकिंग करना, प्रसव पूर्व जन्मे नवजात की देखभाल करना, , नवजात की आवश्यक देखभाल करने के संबंध में जनसमुदाय को जागरूक कर नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, जन्म के तुरंत बाद शीघ्र स्तनपान एवं छह माह तक केवल स्तनपान कराना एवं छह माह के बाद ऊपरी आहार के द्वारा बच्चों को कुपोषित होने से बचाना तथा नवजात का समय से टीकाकरण कराना आदि | चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा इस संबंध में जागरूकता फैलाई जाएगी एवं विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी |
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. पंकज मिश्रा ने बताया कि नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है प्रसव अस्पताल में ही कराएं तथा प्रसव के 48 घंटे बाद तक माँ और नवजात की देखभाल के लिए अस्पताल में ही रुकें | जन्म के तुरंत बाद नवजात को नहलाएं नहीं, शरीर पोंछ कर नरम साफ कपड़े पहनाएं | जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और विटामिन के का इंजेक्शन लगवाएं |
जन्म के तुरंत बाद नवजात को पीला गाढ़ा दूध जिसे कोलस्ट्रम या खीस कहते हैं उसे अवश्य दें और छह माह तक केवल स्तनपान कराएं | शहद, घुट्टी आदि नवजात को कुछ भी न् दें | नवजात जितनी बार चाहे दिन अथवा रात में बार-बार स्तनपान कराएं | केवल स्तनपान कराने से नवजात कुपोषण एवं संक्रमण से बचा रहता है | इसके साथ ही बच्चे की नाल को साफ एवं सूखा रखें | नाल पर कुछ भी न लगायें क्योंकि कुछ भी लगाने से संक्रमण हो सकता है | नाल को अपने आप सूखकर गिरने दें | इसके अलावा नवजात का टीकाकरण करवाएं | कम वजन एवं समय से पहले जन्मे जन्मे शिशुओं का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है | शिशु का तापमान नियंत्रित रखने के लिए कंगारू विधि केयर अपनाएं जिसमें माँ की त्वचा का सीधा संपर्क बच्चे की त्वचा से होता है |
मन में कोई शंका हो तो आशा कार्यकर्ता, एएनएम व प्रशिक्षित डाक्टर से संपर्क करें |

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