लैला-मजनू की मजार, जहां लगता है प्रेमियों का मेला

in #anupgarhlast month

लैला-मजनू की मजार, जहां लगता है प्रेमियों का मेला
भारत-पाकिस्तान की सरहद पर हर साल आते हैं सैकड़ो प्रेमी
अनूपगढ़
भारत-पाकिस्तान की सरहद पर बिंजौर गांव में एक मजार पर सैकड़ों युगल अपने प्रेम के अमर होने की दुआ मांगते देखे जा सकते हैं। यहां हर साल जून के महीने में एक मेला लगता है जिसमें आने वालों को पूरा यकीन है कि उनकी फरियाद जरूर कुबूल होगी। लैला-मजनू की दास्तान पीढ़ियों से सुनी और सुनाई जा रही है। कहा जाता है कि लैला और मजनू एक दूजे से बेपनाह मोहब्बत करते थे लेकिन उन्हें जबरन जुदा कर दिया गया था। यहां के लोग इस मजार को लैला-मजनू की मजार कहते हैं। हर साल जून के महीने में यहां सैकड़ों की तादाद में लोग पहुंचते हैं क्योंकि यहां इस दौरान मेला लगता है। अब की बार ये मेला 13 जून से 14 जून तक लगेगा

यह मजार जिले के अनूपगढ़ में है। पाकिस्तन की सीमा से यह महज पांच किलोमीटर की दूरी पर है। इस साल भी यहां सैकड़ों की संख्या में विवाहित और प्रेमी जोड़े यहां पहुंचे। यद्यपि इतिहासकार लैला-मजनू के अस्तित्व से इनकार करते हैं। वे इन दोनों को काल्पनिक चरित्र करार देते हैं। परंतु इस मजार पर आने वालों को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। वे तो बस फरियाद लिए यहां चले आते हैं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि हर साल यहां सकड़ों जोड़े लैला-मजनू का अशीर्वाद लेने आते हैं, लेकिन पिछले 10-15 वर्षो में यहां आने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। यहां आने वाले सभी मजहबों के लोग होते हैं। लोगो के अनुसार हिंदू और मुसलमान ही नहीं बल्कि सिख एवं ईसाई भी इस मेले में आते हैं। तो हर साल जून महीने में लैला मजनू की याद में लगने वाले मेले में देशभर से हजारों की संख्या में उनके मुरीद पहुंच कर प्यार भरे जीवन की मन्नत मांगते हैं लेकिन आम दिनों में भी प्यार में असफल दुखी लोगों का तांता मजार पर लगा रहता है. लैला मजनू की मजार पर नवविवाहितों के साथ ही प्यार में धोखा खाए और विवाह का बेस्रबी से इंतजार कर रहे युवक-युवतियां पहुंचकर अपने अमर प्यार के लिए मन्नत मांगते हैं.